Thursday, November 12, 2020

कसडोल से चेतन सिंह की रचना- धनतेरस

रचनाकार -- चेतन सिंह
पता------- -- कसडोल , छत्तीसगढ़
विषय ------ धनतेरस
विधा ------- स्वेच्छित/ काव्य
शीर्षक----- धनतेरस के तेरह दिये .....
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सरहद देश का महफूज है , जिनकी निगाह में !
धनतेरस का पहला दिया , जले उनकी राह में !

नर्स , चिकित्सक ,  स्वा. कर्मी को शत शत प्रणाम !
दूजा दिया समर्पित मैं करूं , कोरोना वीरों के नाम !

सफाई  कर्मी  घर - घर जाकर ,  कचरा  उठाते हैं !
एक दिये से उनके आंगन में , उजियारा फैलाते हैं !

सुरक्षा , सहयोग के साथ ,सेवा का जो काम किये !
चलो  करते  हैं  , पुलिस वालों  के  नाम एक दिये !

गटर में घुस कर , साफ करे जो हमारी गंदगी को !
एक दिये से प्रकाशित करें ,  उनकी  जिंदगी  को !

एक  दिया  उन ,   माता - पिता के  चरणों में !
जीवन  व्यतीत  कर रहे हैं , जो  वृद्धाश्रमों में !

एसिड  अटैक  का ,  शिकार  हुई   जो  बाला !
एक दिये से उनके , जीवन  में  आए  उजाला !

उनकी व्यथा कैसे बयां करूं , जिनकी अस्मत लूटी !
एक  दिया  कुर्बान उनको ,  जिनसे  खुशियां  रूठी !

वो यतीम  बच्चें  जिनका , कोई  नहीं  इस जहां में !
दूर हो तमस सारा ,  ऐसा दिया जले उनके मकां में !

चाहे   जिन  मजबूरियों  से ,   वो   तवायफ   बनी !
धनतेरस के एक दिये से , उनके घर भी हो रोशनी !

शहरों की चकाचौंध में , जो सोते हैं फूटपाथ पर !
उजास का एक दिया ,  बेकसी  वाली हयात पर !

मेहनत  और  श्रम  का ,   जो  देते  हैं  पैगाम !
एक दिया अर्पण  करों ,  उन मजदूरों के नाम !

जिनके  पसीने  की खुशबू से , हम अन्न खाते हैं !
अंतिम दिया हम उन किसानों के नाम जलाते हैं !

जीवन  में जुदा - जुदा है ,  सबके  कर्मों का रंग !
आओ  मनाएं धनतेरस ,  इन  कर्मवीरों  के संग !

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