Thursday, November 12, 2020

बलौदाबाजार से डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर" की रचना- धनतेरस

रचनाकार - डिजेन्द्र कुर्रे"कोहिनूर"
पिपरभावना, जिला बालौदाबाज़ार(छत्तीसगढ़)
विषय - धनतेरस
विधा - दोहा
★★★★★★★★★★★★
    धनतेरस पर दोहे
★★★★★★★★★★★★★★★
सुख वैभव धन धान्य का,धनतेरस है पर्व।
पुण्य रीत यह देश का,मन में भरता गर्व।।

धनतेरस के दीप से , उज्ज्वल हो घर बार।
और जीत ही जीत हो,मिले कभी मत हार।।

माँ लक्ष्मी की हो कृपा,तब मिलता सुखसार।
धनतेरस  के  पर्व  से , सुरभित  है  संसार।।

धनतेरस शुभ आ गया,शुभ-लाभ के संग।
सुरभित वंदन वार में,खुशियाँ रंग बिरंग।।

फुलझड़ियों के रौशनी,करता दीप प्रकाश।
धनतेरस से है  सुरभ,यह  धरती  आकाश।।
★★★★★★★★★★★★★★★
स्वरचित©®
डिजेन्द्र कुर्रे, "कोहिनूर"
छत्तीसगढ़(भारत)

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...