पिपरभावना, जिला बालौदाबाज़ार(छत्तीसगढ़)
विषय - धनतेरस
विधा - दोहा
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धनतेरस पर दोहे
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सुख वैभव धन धान्य का,धनतेरस है पर्व।
पुण्य रीत यह देश का,मन में भरता गर्व।।
धनतेरस के दीप से , उज्ज्वल हो घर बार।
और जीत ही जीत हो,मिले कभी मत हार।।
माँ लक्ष्मी की हो कृपा,तब मिलता सुखसार।
धनतेरस के पर्व से , सुरभित है संसार।।
धनतेरस शुभ आ गया,शुभ-लाभ के संग।
सुरभित वंदन वार में,खुशियाँ रंग बिरंग।।
फुलझड़ियों के रौशनी,करता दीप प्रकाश।
धनतेरस से है सुरभ,यह धरती आकाश।।
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स्वरचित©®
डिजेन्द्र कुर्रे, "कोहिनूर"
छत्तीसगढ़(भारत)
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