जिला :- महासमुंद
विषय :- मुस्कान
विधा :- दोहा छंद
शीर्षक :- जोगी के दोहे
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हर गम अरु हर दर्द से, होकर के अंजान।
फूलों सी मुख में सदा, खिली रहे मुस्कान।।१।।
मुस्काता मुख नित करे, नव ऊर्जा संचार।
मुस्काता मुख बाँटता, सकल जगत में प्यार।।२।।
मुस्काता गर मनु करे, जग में कोई काम।
नव ऊर्जा मुस्कान की, सफल करे अविराम।।३।।
मुस्काता मुख है बना, मानव का श्रृंगार।
शीतलता नित देत है, मिटा हृदय अंगार।।४।।
बच्चों सा निश्छल सखा, हो मन में मुस्कान।
जो निर्मल मन से करे, जन - जन का सम्मान।।५।।
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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने मुस्कान के महत्व का बखान करते हुए कहा है कि मुस्कान मन में नव ऊर्जा का संचार करती है, वह मानव मुख का श्रृंगार है, साथ ही मुस्कान शीतलता प्रदान करती है। अतः हमें सदैव बच्चों सा निश्छल मन एवं फूलों सी मुख में मुस्कान रखनी चाहिए।
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