स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- आलेख
शीर्षक -"मुस्कान "
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एक गर्म मुस्कान दयालुता की सार्वभौमिक भाषा है ।मुस्कान जीवन के बड़े से बड़े दुख को कम कर देती है, चाहे वह खुद के लिए हो या फिर किसी गैर के लिए ।चेहरे की सुंदरता मुस्कान से आंकी-जाती हो लेकिन मुस्कुराहट के मायने सुंदरता से कहीं बढ़कर हो जाती है जब मुस्कुरा के बात करने वाले इंसान की मुस्कुराहट किसी के दुख को कम कर दे और सामने वालों को हमेशा ख़ुशी दे, बसर्ते कि किसी के दुख या परेशानी में न मुस्कुराएं। अतः मुस्कान से चेहरा और चरित्र दोनों खिल जाते हैं ।
मुस्कुराने से ना तो पैसे खर्च करने पड़ते हैं और ना ही कोई कठिन परिश्रम करना पड़ता है ,लेकिन फिर भी संसार में 100 में से कुछ ही लोग मुस्कान बिखेरते नजर आते हैं । कुछ लोग तो ऐसे भी हैं जो मुस्कुराने का दिखावा करते हैं पर मन में तो कड़वाहट का जहर होता है। दिल की कड़वाहट बनावटी मुस्कान के साथ सामने वाले को भी नकली मुस्कुराने के लिए प्रेरित करते हैं,जबकि कुछ लोग बात -बात में मुस्कुराकर दिल की खुशी होठों तक ले आते हैं और उनके आते ही सारा आलम खुशमिजाज सा लगने लगता है।
जानकार कहते हैं कि दिन में कम से कम एक बार जोर से जरूर हंसना चाहिए इससे शरीर स्वस्थ रहता है ।चेहरे के व्यायाम के साथ-साथ धनात्मक लहर वातावरण में प्रसारित होती है और उस वातावरण में शामिल होने वाला प्रत्येक जीव अच्छा महसूस करता है।दूसरों को खुशी देना इंसानियत का पहला उसूल होता है । मुस्कुराकर आप किसी को खुशी देते हैं तो आप इंसानियत का काम कर रहे होते हैं ।
अतः मुस्कान से आप अपना तो भला करेंगे साथ-साथ दूसरों को भी मुस्कुराना सिखा कर उसका भी भला करेंगे अतः आपसे एक छोटी सी गुजारिश है मुस्कुराइए और खुशियों की फुलझड़ियां चलाइए एवं दूसरों तक मुस्कान पहुंचाइए।
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