Tuesday, November 10, 2020

कांकेर से मीराआर्ची चौहान की रचना- चिलमीलिका

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-चिलमीळिका(जुगनू)
विधा-कविता ( मुक्त छंद)

अंधेरी अमावस रात में,
अनिमेष कौन बैठा है ।
टिमटिमाता लालटेन ले
राह पर कौन  चलता है ।

तिमिर का राज जान कर ,
विद्रोह की ज्वाला जलाये।
कठिन संकल्प लेकर वह,
दीपक-सा वह जलता है।

चीर देगा राह में  वो स्याह
अंधेरे की  गहरी कालिमा ।
पंथ में पलकें  बिछाकर,
ये सोन किरवा कहता है ।

 अरे दुर्दिन  आ नहीं सकता,
 उसके साहस के साये में।
 हौसले का चारपाई बिछा,
  वो  बर्फीली  ठंड सहता है ।

सबेरा  तो होना है निश्चित,
परबिजना बात कहता है।
 न होना  कभी लक्ष्य से परे,
रात भर  जलकर कहता है।

मीराआर्ची  चौहान
कांकेर,छग
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