जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-चिलमीळिका(जुगनू)
विधा-कविता ( मुक्त छंद)
अंधेरी अमावस रात में,
अनिमेष कौन बैठा है ।
टिमटिमाता लालटेन ले
राह पर कौन चलता है ।
तिमिर का राज जान कर ,
विद्रोह की ज्वाला जलाये।
कठिन संकल्प लेकर वह,
दीपक-सा वह जलता है।
चीर देगा राह में वो स्याह
अंधेरे की गहरी कालिमा ।
पंथ में पलकें बिछाकर,
ये सोन किरवा कहता है ।
अरे दुर्दिन आ नहीं सकता,
उसके साहस के साये में।
हौसले का चारपाई बिछा,
वो बर्फीली ठंड सहता है ।
सबेरा तो होना है निश्चित,
परबिजना बात कहता है।
न होना कभी लक्ष्य से परे,
रात भर जलकर कहता है।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
___________,_,__,__
No comments:
Post a Comment