स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला-जांजगीर-चाम्पा/छत्तीसगढ़
विधा-कविता
शीर्षक-हीरों का हार
मेरे पास हीरों का हार,देने को नहीं उपहार ।
मैं दौलत मंद नहीं, बदल लो अपना विचार ।
न सोने का कंगन दे पाऊंगा,
न सोने की चूड़ी ला पाऊंगा ।
छोड़ो तुम अपनी जिद को,
नहीं होगा ये सपना साकार ।
न मोती की सपना तुम देखो,
न पन्ना की बातों को छेड़ो ।
गरीबों के ये होते न मित्र,
रोको अपने आंखों की धार ।
गरीबी में ये कहां मिलेगा ,
सपनों का फूल न खिलेगा ।
इससे अच्छा है देखना छोड़ो ।
इनके बिना करो तुम श्रृंगार ।
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