Wednesday, November 18, 2020

रायपुर से एच-एस-अरमो की रचना- भ्रष्टाचार की राजधानी

रचनाकार--एच-एस-अरमो, अरमान ।
निवास- बायरन बाजार,रायपुर ।
जिला--रायपुर ,छत्तीसगढ़ ।
विधा-छ्न्द मुक्त कविता ।
शीर्षक-" भ्रष्टाचार की राजधानी " ।
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●||••भ्रष्टाचार की राजधानी ••||●
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लोकतंत्र के राज में---
देश का संविधान ही,कानून है ।
देश की आजादी और गणतंत्र लागू ,
अस्तित्व में,तभी संप्रभुता आयी ।

प्रथम चुनाव हुये---
राजनैतिक दलीय सरकार बनीं ,
शासन-प्रशासन,कार्यपालिका और न्यायपालिका व विधायिका हुयीं ।

राज्यों की स्थापना/पुनर्गठन हुआ--
विधान सभा/विधान मण्डल बनें ,
सत्ता केन्द्रीयकरण/विकेंद्रीकरण,
देश की विकास की योजनाएँ लागू हुयी,
जनसँख्या वृद्धि,गरीबी,बेकारी और 
प्राकृतिक प्रकोप भी घटित हुये,
अमीरी-गरीबी,पूंजीपतियों की,
नई-नई जमात भी उभरी--।

केन्द्र /राज्य शासन में---
विकास की नीतियाँ बनीं ,
योजनाओं की धनराशि व बजट,
में,घालमेल शुरु हुयी---
भ्रष्टाचार की,यहाँ से शुरूआत हुयी ।

छत्तीसगढ़ नव राज्य की स्थापना---
और रायपुर,नई राजधानी बनी ,
आशायें,विकास व प्रगति की थीं,
सभी क्षेत्रों में विकास हो रहा है--?

नेता,शासक व व्यापारी गण खुश हुये,
जनता भी,दर्दों के साथ,खुश हुयी ,
दलीय सरकारें बनीं,सरकारें बदली ।

विकास के नाम--नव-निर्माण हुये--
निर्माण फिर पुनर्निर्माण हुये ,
सरकारी धनराशि का--
कुछ सदुपयोग-दुरुपयोग भी किये ।

भ्रष्ट व्यक्तियों का,जमावड़ा हुआ ---
राजधानी में,बिचौलियों का गढ़ बना ,
चोरी-लुटपाट और ठगी का--
खेल चला व भ्रष्टाचार का मेल बढ़ा-।

आदिवासी बाहुल्य राज्य में--
गौरव पथ के निर्माण हुये ,
पर ,जनता का गौरव--
राजनेता,शासकों की,तुलना में,
क्यों,इतना पीछे छूट गया--।

धान का कटोरा---
किसानों को,उनकी फसलों का,
उचित दाम व बोनस का वादा,
क्यों,चुनावी वादों के अब--
भेंट चढ़ गया है ।
अब तो,रिश्वत,दलाली,यहाँ तो,
काम की,तहजीब हुयी,
गाँवों से,हो रहा पलायन भी,
रोजगार की तलाश व बेरोजगारी की,
प्रचंड मार व माँग से--।

नक्सलवाद से,सुरक्षा के नाम---
केन्द्र से,धनराशि तो,बहुत आयी,
पर,यह समस्या तो,वहीं की वहीं,
आज भी बनी दिख रही है--?
सुलगते सवाल और---
भ्रष्टाचार की राजधानी में,
राजनीति बनकर,यूहीं दबकर रह गई।

आम छत्तीसगढिया पूरा छत्तीसगढिया,
भी नहीं बन पाया--
राजभाषा छत्तीसगढ़ी मंजिल की,
तलाश में,आज भी,भटक रही है ।

राज्य की सूरतें,बदली तो हैं--
पर,भ्रष्टाचार की राजधानी में,
ऐसी सूरतें भी तो,देखने मिली हैं ।

भ्रष्टाचार की राजधानी रोकने--
खुद को ईमानदार बनना होगा,
इंसानियत को,जिन्दा रखने--
नैतिकता को,आगे रखना होगा,
न रिश्वत देगें ,न लेंगे और--
भ्रष्टाचार को,होने देगें --
ऐसा सबको,संकल्प लेना होगा--।
=======इति ============
व्याख्या--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज उठाने की जरूरत है और भ्रष्टाचार की राजधानी का पर्याय को बदलने के लिए प्रयास करना होगा ।
===18/11/2020===========

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