जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग. )
विषय - भ्रष्टाचार की राजधानी
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - मिटेगा भ्रष्टाचार
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// मिटेगा भ्रष्टाचार //
गूँज उठा है आज गगन में ,
जनता की ललकार ।
गद्दारों से तान के सीना ,
लड़ने को तैयार ।।
मिटेगा भ्रष्टाचार.....( 4 बार )
क्या बच्चे क्या वृद्ध - जवान ,
कदम मिलाकर चलते ।
जाग उठा है सारा देश ,
वन्दे मातरम् कहते ।।
अनशन धरना आंदोलन की ,
गाड़ी चली रफ्तार ।
मिटेगा भ्रष्टाचार..... ( 4 बार )
बड़े - बड़े रिश्वत घोटाले ,
मँहगाई की सुरसा ।
पीड़ित व्याकुल जनता को ,
आया खूब है गुस्सा ।।
निकल पड़े हैं सभी सड़क पर ,
भरती है हुंकार ।
मिटेगा भ्रष्टाचार..... ( 4 बार )
भ्रष्टाचार के रूप अनेक ,
यह बहरूपिया रावण ।
आतंकवाद गरीबी अशिक्षा ,
कोटि समस्याओं के कारण ।।
अब न चलेगा रावण राज ,
जनता बड़ी होशियार ।
मिटेगा भ्रष्टाचार..... ( 4 बार )
चंद लोग ही जुल्म ढहाते ,
लोकतंत्र की हत्या ।
पद पैसे और सत्ता हेतु ,
कथनी - करनी मिथ्या ।।
जंग छिड़ गई देश बचाने ,
आर कहो या पार ।
मिटेगा भ्रष्टाचार..... ( 4 बार )
भारतमाता के चरणों में ,
जनता की कुर्बानी है ।
देश बचेगा देशभक्तों से ,
जिनकी अमर कहानी है ।।
स्वच्छ पारदर्शी सुराज की ,
बहेगी गंगा धार ।
मिटेगा भ्रष्टाचार..... ( 4 बार )
गूँज उठा है आज गगन में ,
जनता की ललकार ।
गद्दारों से तान के सीना ,
लड़ने को तैयार ।।
मिटेगा भ्रष्टाचार..... ( 4 बार )
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नोट - जब पूरे भारत देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ श्री अन्ना हजारे जी ने बिगुल बजा दिया था और आंदोलन चरमोत्कर्ष पर था , उस समय की मेरी यह रचना है ।
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