जिला :- महासमुंद
विषय :- चिलमीलिका
शीर्षक :- चिलमीलिका से सीख
विधा :- छंद मुक्त कविता
#######################
चल पड़ा इस काली रात में,
चिलमीलिका सा मन में लौ लिए।
चमकना हैं चांदनी सा राह में,
है मंजिल तक जाने की आस लिए।
सरलता के सूरज खिले दिन में,
सहजता से आगे बढ़ जाऊंगा।
ज्यों आई कठिनाई काली रात बन,
मैं चिलमीलिका सा राह रौशन कर जाऊंगा।
फिर ना निरंतरता अवरूद्ध होगी,
अविरल बढ़ मिलेगी मंजिल।
गर हो हौसला लड़ने की मन में,
हर मुकाम मुझे होगी हासिल।
ली सीख नन्हें चिलमीलिका से,
ऊंचे हौसलों की मेरी उड़ान है।
खुद के बल पर चल पड़ूंगा,
है उर में बसा इतना सा अरमान है।
#######################
व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने अपने आप को चिलमीलिका अर्थात जूगनू की भांति निरंतर आगे बढ़ने की प्रेरणा देने का प्रयास किया है।
No comments:
Post a Comment