जिला - बलौदाबाजार (छ. ग.)
विधा - मुक्त कविता
शीर्षक - " जगमग दीपावली "
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आओ दीपावली का त्यौहार मनायें।
दीपों से घर-द्वार सजायें।
रोशन कर हर कोने को,
अंधियारा को दूर भगायें।।
रंगोली से आँगन सजायें।
माँ लक्ष्मी को घर बुलायें।
प्रेम भाव से सब मिलकर,
श्रद्धा के दो फूल चढ़ायें।।
माँ के चरणों में शीश झुकायें।
सुख-समृध्दि का आशीर्वाद पायें।
धन-वैभव से पूर्ण हो जीवन सबकी,
सुमधुर माँ लक्ष्मी की आरती गायें।।
सद्भावना का रिश्ता बनायें।
रिश्तों में मीठी-मिठास लायें।
सहयोग कर जरुरतमंदों का,
दीपावली में चार चाँद लगायें।।
भेदभाव को दूर भगायें।
मन में अपनेपन का फूल खिलायें।
जाति-पाति को भूलकर,
एकता का प्रतीक दिखायें।।
आशाओं की दीप जलायें।
निराशा को न पास लायें।
खुशियों का पिटारा खोलो सभी,
विकास पथ पर बढ़ते जायें।।
मास्क चेहरे पर जरुर लगायें।
जागरुक नागरिक का फर्ज निभायें।
दीपावली की इस पावन पर्व पर,
मानव हित में कदम बढ़ायें।।
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मौलिक रचना ( स्वरचित )
संतराम कुम्हार
बलौदाबाजार (छ.ग.)
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