जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग.)
विषय - लहर / प्रवाह
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - एक लहर ही तो है
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// एक लहर ही तो है //
सागर की सतह पर ,
आते सुनामी और भँवर ,
ज्वार - भाटा भी यथा समय पर ।
जल का यह हलचल टकराव ,
एक लहर ही तो है ।।
जीवन भी एक धारा है ,
सुख - दुःख का किनारा है ,
बहते जाना ही कर्म हमारा है ।
आने वाला हर मोड़ - पड़ाव ,
एक लहर ही तो है ।।
काम क्रोध लोभ अहंकार ,
झूठ कपट छल का व्यवहार ,
क्षण भर का आवेग उद्गार ।
मन - इंद्रियों की चाल अटपटी ,
एक लहर ही तो है ।।
त्याग प्रेम करुणा की भावना ,
सेवा सत्कर्म भक्ति प्रार्थना ,
ज्ञान ध्यान की बात समझना ।
जो श्रद्धा - विश्वास से प्रेरित ,
एक लहर ही तो है ।।
अच्छाई हो या बुराई ,
सबके अन्दर ही समाई ,
किन्तु जाएँ किधर भाई ?
बुद्धि - विवेक से निर्णय करना ,
एक लहर ही तो है ।।
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