जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-आंँखे
विधा-कविता
सपने संजोती वो शबनमी आंँखे,
मेहनत करती वो झील -सीआंँखे
अपनत्व भरी ममता मयी आंँखे,
दुल्हन के जोड़े में शर्मीली आंँखे ।
अल्हड़ बाला की नरगिसी आंँखे ,
नन्हें बच्चे की वो चंचल आंँखे ।
चश्में लगी वो पथराई - सी आंँखे,
जाने कहाँ गई वो अलसाई आंँखे
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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