निवास-बैरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
विधा-मुक्त ।
शीर्षक:--" शुभ -दीपावली "
======================
आओ हम,ऐसा एक दीप जलायें---
जो तिमिर को,हमेशा के लिए,
दूर भगायें,अवसाद भरे मन में,
आओ हम,खुशियों का दीप जलायें ।
मँहगाई और भ्रष्टाचार से---
हैं,सब परेशाँ--
पर, सुख-सुविधाओं से,
नहीं है,किसी को,भी परहेज,
ये,कैसी,शिकवा-शिकायत है,
जो,आज,हर किसी के,
जुबां में बसी है ।
"अरमान "जमाने में तुम भी खड़े हो-?
चाहत बस ,इतनी रखना तुम,
हर घर में हो रोशनी,
मिट जाए,हर-गम का अँधेरा ।
खुशियाँ ही खुशियाँ हो,
सबके दामन में,
मन में,फुलझड़ियाँ जलें,
और अनार दाने सी ,खुशियाँ बिखरें ।
फूटे विनाशक-बाधाओं के,सारे पटाखें,
अनैतिकता की चकरी जले,
और जलकर राख हो,
ऐसी सुबह,ऐसी भी रात हो ।
सबके मन में होवे,
भाईचारा सा भाव,
और बंटती रहे,
अपनेपन की,रसभरी मिठाईयाँ ।
अपने जीवन का,तुम---
ऐसा एक लक्ष्य बनाओ,
अपनी मंजिल को पाने,
ऐसा एक राकेट पटाखा तो दागो ।
सच्ची-दोस्ती का,साथ निभाने,
तुम,अपने,मन के अँधियारे में,
अपनत्व का,आओ ऐसा एक दीप जलायें,
फिर,देखो,कैसे रोशन होती है,ये दुनिया,
जलते,जगमगाते असंख्य दियों की तरह ।
दिपोमहोत्सव की खुशियाँ,
लुटा रहा "अरमान "
पहुँचे ये संदेश,सबके द्वारे,पूरे होवे,
सब "अरमान " ।
======$$$$$$$$$$=======
No comments:
Post a Comment