Saturday, November 7, 2020

जांजगीर-चांपा से संतोष प्रधान "कचंदा" की रचना- जीवन

नाम-    संतोष प्रधान "कचंदा"
स्थान-  कचंदा
जिला-  जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा- कविता
शीर्षक- जीवन की आस 

             जीवन की आस 

मेरे   खून-पसीने   की   कमाई  लूट गई आज ।
मेरे    सुखमय  जीवन    में   गिर गया है गाज ।।

सभी   साथ  छोड़   चले  अब सहारा  कौन है ?
तन शिथिल अब मेरा मनोमस्तिष्क भी मौन है ।
भाग्य  भी  मुझसे अब  हो गया है नाराज ।
मेरे  सुखमय  जीवन में गिर गया है गाज ।।

कौन निकालेगा मुझे इस घोर संकट से ?
कौन छुड़ाएगा मुझे इस क्रुध कंझट से ?
अब मेरा कौन है किसको दूँ आवाज ।
मेरे सुखमय   जीवन में गिर गया है गाज ।।

स्वार्थ की इस दुनिया में किसे अपना मानूं ।
किस पर करूँ अब यकीन किसे अपना जानूं ।
मेरी दुर्दशा   को देखकर   भी चुप है समाज ।
मेरे  सुखमय  जीवन में गिर गया है गाज ।।

दे दे नवजीवन प्रभु तेरी शरण में आया हूँ।
भूलकर सब दुःख दर्द तुझमें ही समाया हूँ ।
सुखमय जीवन दे दे , फिर तू आज ।
मेरे सुखमय जीवन में गिर गया है गाज ।।

फिर से मेरे जीवन को कर दे बहाल ।
काट दें मेरे सभी दुर्भाग्य के जाल।
पहना मेरे सर में खुशियों की ताज।
मेरे सुखमय जीवन में गिर गया है गाज ।।

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