Friday, November 20, 2020

बेमेतरा से सूर्य प्रकाश पाटिल की रचना- कश्ती और मस्ती

रचनाकार सूर्य प्रकाश पाटिल
जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विषय कागज की कश्ती
शीर्षक  कश्ती और मस्ती
विधा छंद मुक्त कविता

          कश्ती और मस्ती

बरसात का मौसम,
         अंगड़ाई लेता वो सावन ,
वो बचपन की मस्ती,
       वो कागज की कश्ती,
याद आती है आज,
        हर पल हर दम ....
बचपन में,,,
            बारिश में भीगना
छिपाकर चुपके से,
           कागज की कश्ती बनाना,
और चलाकर उसे गली में,
          मस्ती से झूमना,,
याद आता है आज,
          वो लम्हा था जो अपना।
काश,,, आज...
       उसी मस्ती में झूम पाते,
गलियों में मदमस्त,
         कागज की कश्ती चला पाते।
पर... आज मस्ती और कश्ती,
           दोनों ही खो गई ,
अपनी हस्ती बनाते बनाते,
        हस्ती बनी या नहीं मेरी,
मुझे नहीं है ये पता,
        पर हां....
हस्ती के मायाजाल में,
        मेरी वो कागज़ की कश्ती खो गई......
     सूर्य प्रकाश पाटिल

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