Friday, November 20, 2020

कसडोल से चेतन सिंह की रचना- कागज़ की कश्ती

रचनाकार -- चेतन सिंह
पता -------- कसडोल, छत्तीसगढ़
विषय ------ कागज़ की कश्ती
शीर्षक ----- बचपन की यादें
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हमको    आज   तक  , वो जमाना  याद  है !
बचपन    का   हर    ,   फ़साना     याद   है !

आज   की   पीढ़ी  ,  क्या    जाने    तैराकी ,
हमें नदी - तालाब में ,कूद कर नहाना याद है !

घुमड़ते       बादल ,       बरसते     पानी   में ,
कागज़     की    कश्ती ,     चलाना  याद  है !

बहते     पानी    में  , डूब   न    जाये  कश्ती ,
अपनी    कश्ती  संग , दूर  तक जाना याद है !

बारिश     की   पहली  ,  बूंदों    का     मज़ा ,
झूम     कर    नाचना   और   गाना  याद   है !

बारिश    में  मिट्टी  की  ,  सौंधी - सी    महक ,
घरों   में   सांपों  का ,  निकल  आना  याद  है !

रासायनिक खाद ने  ,बना दिए जमीं को बंजर ,
गोबर  खाद से फसलों का , लहलहाना याद है !

मैं  कैसे भूलूं  , पतंग के  डोर व  कंचे की गोटी ,
खो-खो, कबड्डी में घुटने का छिल जाना याद है !

बालपन    की   वो     छोटी  -  छोटी    शरारतें ,
मित्रों संग लड़ना व  फिर से मिल जाना याद है !

पंछिया     भी   अब  , आते   नहीं   मुंडेर    पर ,
आंगन   में   गौरैया   का ,  चहचहाना  याद  है !

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