पता -------- कसडोल, छत्तीसगढ़
विषय ------ कागज़ की कश्ती
शीर्षक ----- बचपन की यादें
______________________________________
हमको आज तक , वो जमाना याद है !
बचपन का हर , फ़साना याद है !
आज की पीढ़ी , क्या जाने तैराकी ,
हमें नदी - तालाब में ,कूद कर नहाना याद है !
घुमड़ते बादल , बरसते पानी में ,
कागज़ की कश्ती , चलाना याद है !
बहते पानी में , डूब न जाये कश्ती ,
अपनी कश्ती संग , दूर तक जाना याद है !
बारिश की पहली , बूंदों का मज़ा ,
झूम कर नाचना और गाना याद है !
बारिश में मिट्टी की , सौंधी - सी महक ,
घरों में सांपों का , निकल आना याद है !
रासायनिक खाद ने ,बना दिए जमीं को बंजर ,
गोबर खाद से फसलों का , लहलहाना याद है !
मैं कैसे भूलूं , पतंग के डोर व कंचे की गोटी ,
खो-खो, कबड्डी में घुटने का छिल जाना याद है !
बालपन की वो छोटी - छोटी शरारतें ,
मित्रों संग लड़ना व फिर से मिल जाना याद है !
पंछिया भी अब , आते नहीं मुंडेर पर ,
आंगन में गौरैया का , चहचहाना याद है !
No comments:
Post a Comment