जिला बेमेतरा छत्तीसगढ़
विषय भ्रष्टाचार की राजधानी
शीर्षक चाय पानी
विधा आलेख
चाय पानी
हमारे देश में मेहमान का स्वागत कम से कम चाय पानी से किया जाता है। कहीं भी किसी के घर जाएं तो वहां से चाय पानी पिए बिना जाने नहीं दिया जाता। यह हमारे देश एवम् हर राज्य में परम्परा है। यह बिना मांगे मिल जाने वाली परम्परा है।
परन्तु बिन मांगे मिल जाने वाली यह परम्परा कब और कैसे मांगने वाली परम्परा बन गई इसके बारे में कुछ नहीं कहा जा सकता। क्योंकि हमारे देश की संस्कृति ने हमेशा देना सिखाया है मांगने की परम्परा भारतीय संस्कृति में नहीं रही है।
और आज हर जगह, हर ऑफिस में, स्कूल से लेकर अस्पताल तक, चपरासी से लेकर हाई कमान तक सभी जगह चाय पानी मांगी जाती है। चाय पानी के बिना आज के समय में कोई काम नहीं होता।
10 रुपए से शुरू यह चाय पानी हजारों, करोड़ों तक जाती है। आज के समय में चाय पानी देकर कोई कार्य कराया जा सकता है। आज के समय में जिसके पास पैसा है उसी के पास ताकत है और पैसे के बल पर वह अपनी ताकत बढ़ाता जाता है यही वजह है कि हमारे देश में अमीर और अमीर, और गरीब और गरीब होते जा रहे हैं।
हमारे देश का कानून लचीला है यही कारण है कि चाय पानी की यह परम्परा सुरशा की मुहं की भांति दिनों दिन बढ़ती जा रही है।
देश की कानून व्यवस्था को मजबूत बना कर ही हमारे देश से चाय पानी रूपी भ्रष्टाचार को खत्म किया जा सकता है। भ्रष्टाचार की मुख्य जड़ यही चाय पानी है जब तक इस मांगे जाने वाले चाय पानी को खत्म नहीं किया जाता तब तक देश एवम् समाज का विकास नहीं किया जा सकता। इस कारण चाय पानी की परम्परा को जड़ से मिटाने की आवश्यकता है ताकि देश व समाज का विकास हो सके....
सूर्य प्रकाश पाटिल
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