Wednesday, November 18, 2020

रायगढ़ से उर्मिला सिदार की रचना- भ्रष्टाचार

रचनाकार - उर्मिला सिदार 
ग्राम - बुलांकी 
जिला - रायगढ़ छत्तीसगढ़ 
विधा - कविता 
विषय - भ्रष्टाचार की राजधानी
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         *भ्रष्टाचार की राजधानी*
भ्रष्टाचार की राजधानी,
कर रहे हैं जनता मनमानी।
भय, आस्था, प्रलोभन,
यही है मानव का बंधन।

न सुख-शांति न संतोष,
हा हा कार कर रहे हैं उद्घोष।
जहां भी देखो उदासी छायी है,
धरा पर घोर कलयुग आयी है।

न्याय ,धर्म ,सत्य की पता नहीं,
सुविधा संग्रह का राज है। 
भ्रष्टाचार की राजधानी में,
न शर्म हया ना लाज है।

ये कैसे भ्रष्टाचार की राजधानी, 
लोग कर रहे हैं मनमानी। 
अनियंत्रित हो जी रहे हैं,
भौतिकता के हो रहे गुलामी।
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                          उर्मिला सिदार 
                     रायगढ़ छत्तीसगढ़

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