Wednesday, November 25, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना- बाल कवि श्री इंद्रपाल पटनायक

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा- आलेख/जीवनी
शीर्षक -"बाल- कवि श्री इंद्रपाल पटनायक"
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          लेखन के क्षेत्र में मेरे प्रेरणा स्रोत आदरणीय श्री इंद्रपाल पटनायक जी हैं।आदरणीय इंद्रपाल जी मेरे माता जी के मौसी जी के बेटे हैं अर्थात मेरे मामाजी हैं।
          इनका जन्म 2 जुलाई सन 1942 को तमनार में हुआ। इनके पिताजी का नाम श्री रघुनाथ पटनायक एवं माता जी का नाम श्रीमती मैथिली पटनायक है ।बचपन से ही बड़े ही मेधावी छात्र रहे । इनका व्यक्तित्व ढाक के चिकने पात मुहावरा पर खरा उतरता है।इनकी रूचि लेखन कला में शुरू से ही थी पर घर के बड़े पुत्र होने के नाते उनकी जिम्मेदारी अधिक थी अतः वे शुरू -शुरू में रुचि होने के बावजूद भी लेखन ना कर सके।
           इनकी प्रारंभिक शिक्षा तमनार जिला रायगढ़ में ही हुई और हाई स्कूल की पढ़ाई भी तमनार के शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में पूर्ण हुई।मेट्रिक की पढ़ाई अच्छे अंकों में उत्तीर्ण होने के पश्चात इन्होंने बहुत ही कम उम्र में शिक्षक की नौकरी की।इनका विवाह श्रीमती कमलिनी पटनायक से हुआ।
           इनका शिक्षकीय जीवन भी बहुत शानदार रहा है।यह बच्चों को गीतों के माध्यम से, कविताओं के माध्यम से पढ़ाते थे ।प्राइमरी स्तर के बच्चे इनकी कक्षाओं में बड़े ही रुचि पूर्वक बैठते थे। फूल, पत्ती ,हाथी ,घोड़ा ,बाटी ,भंवरा इन छोटी -छोटी चीजों को भी बच्चों को बताते तो कविताओं के माध्यम से बताते उनके इस रूप को बच्चे झट से समझते और उनकी कक्षा में बहुत आनंद लेते थे। इनके शिक्षकीय जीवन में उनके द्वारा कई रचनाएं भी की गई ।उनकी लेखनी बालकों के लिए ही चली ,अतः वे बाल -कवि के रूप में चर्चित हुए।
           सन 2004 में वे शिक्षकीय जीवन से निवृत्त होकर लेखन कार्य करते रहे । 2014 में इनकी कुछ रचनाएं जो पुस्तक बद्ध हो पाईं । इनकी प्रकाशित पुस्तकों में- मां के लिए, सूरज-चांद-सितारे ,मां के दुलारे ,आदि हैं ।कई अनगिनत कविताएं और हैं जो इनके डायरी के पन्नों में बंद हैं जो पब्लिश ना हो पाईं। 
          विकासखंड, जिला एवं स्थानीय स्तर पर इन्हें कई सम्मान प्राप्त हुए हैं। कविताओं के अलावा इन्होंने कुछ विषयों जैसे बेटी बचाओ ,साधना ,एवं फूलों आदि पर सुझावात्मक  लेख भी लिखे हैं।
          कवि के साथ-साथ एक अच्छे शिक्षक एवं एक अच्छे इंसान भी हैं ।इन्होंने अपना सारा जीवन बच्चों की शिक्षा को समर्पित किया ।2014 के बाद इन्होंने अपना जीवन ईश्वर सेवा को  समर्पित करते हुए  सन्यास ग्रहण कर लिया ।

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