जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-महादेवी वर्मा
विधा-कविता (मुक्त छंद)
न ही उन्हें देखी,न ही उन्हें पहचाना,
पढ़कर उनकी कविता मैने
उन्हें जाना।
रंग के कारण पति ने किया
उनका त्याग,
पर कुलपति बन दिखा दिया
अपना काम ।
कभी सोना हिरणी तो कभी
चीनी फेरीवाला,
ये ही थे उनके अपने मन से
उन्हें माना।
परिस्थितियां नहीं डिगा पाई उन्हें
कभी भी,
महादेवी वर्मा इसलिए बनी प्रेरणा
हमारी ।।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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