ग्राम -बुलाँकी
जिला- रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
विधा- कविता( मुक्तक छंद)
विषय -पुराने पन्ने
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*पुराने पन्ने*
पुराने पन्ने अतीत की यादें ,
खट्टी -मीठी बिताए पल हमें।
कभी-कभी अनायास ही यादें,
सुकून या कुंठित कर जाते हैं।
भविष्य की सुखद पल की यादें,
मन को कुछ पल प्रफुल्लित कर,
काल्पनिक दुनियाँ की सैर कराते
हैं ,
दुःखद घटनाएंँ मन को तिरोहित
कर जाते हैं।
भूतकाल की पीड़ा ,वर्तमान से विरोध।
भविष्य की चिंता से ग्रसित है,
मानव ।
पुराने पन्ने की अतीत में अपने
को,
अवसर मिलने पर दुबोऐ रहते हैं।
पुराने पन्ने की स्मरण कर,
वर्तमान को खराब करते हैं।
भविष्य की चिंता कर मनुष्य,
स्वयं के गंतव्य भूल जाते हैं।
पुराने पन्ने से सुखद प्रेरणा ले,
वर्तमान में सत्य को स्वीकारें।
भविष्य के लिए चिंतन करें,
स्वतंत्र हो मानवीयता में जी ले।
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व्याख्या :-इस कविता में अतीत के पन्ने के प्रभाव को दर्शाया गया है।
उर्मिला सिदार रायगढ़ छत्तीसगढ़
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