स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- आलेख
शीर्षक -"बाल-साहित्य: एक परिचय"
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बालकों के लिए लिखी गई साहित्य बाल साहित्य कहलाती है । बालकों के मनः स्थिति के अनुरूप लेखन करने वाले कवि बाल- कवि या बाल -साहित्यकार कहलाते हैं ,एवं इनकी विशेष रूप से जिम्मेदारी होती है कि वे बालकों के मानसिक स्तर को ध्यान रखें ।बाल- साहित्य में बालको को रुचिपूर्ण लगे ऐसी विषय वस्तु शामिल होते हैं। बाल साहित्य में रोचकता, शिक्षाप्रद लेते हुए बाल -कहानियां ,बाल- गीत व छोटी- छोटी कविताएं आती हैं।
बाल -साहित्य काफी पहले से लिखा जाता रहा है ।बाल -साहित्य में कई साहित्यकार हुए जो इसे विस्तारित करते हैं और इसको अपना एक विशेष स्थान दिलाते हैं। जिसके कारण बाल -साहित्य का स्थान हिंदी साहित्य में अपनी उत्कृष्टता को प्रदर्शित करता है।बाल साहित्य में पंचतंत्र की कहानियां न सिर्फ शिक्षा के दृष्टिकोण से बल्कि बच्चों में इसके प्रति रुचि को भी बढ़ाती नजर आती है ।जयप्रकाश भारती जी बाल साहित्य को इसके उच्च शिखर तक पहुंचाने में अपनी महति भूमिका निभाते हैं ।जयप्रकाश भारती के अलावा श्याम सिंह शशि, मधुमती,रोहिता अष्टांग आदि।
बाल -साहित्य का मकसद सिर्फ बच्चों का मनोरंजन करना ही नहीं अपितु बच्चों को विकास की राह पकड़ाना भी है ।बच्चों के नैतिक मूल्यों ,मानसिक स्थितियों को प्रबलता की ओर ले जाना है । अतः बाल साहित्य समाज और देश के लिए भावी उत्तरदाई नागरिक बनाने की भूमिका में नजर आता है ।बाल -साहित्यकार की एक बड़ी जिम्मेदारी बनती है कि वह बाल -मनोविज्ञान की समझ रखे एवं उसके मुताबिक रचनाकर बालकों का हित करें, ताकि वे आगे चलकर अपना और अपने देश का नाम रोशन कर सकें, क्योंकि आज के बच्चे कल के भावी नागरिक होंगे । बाल- साहित्यकार ऐसे हो जो बालकों के मन के भीतर झांककर उनमें संस्कार, समर्पण ,सद्भाव एवं भारतीयता को बिठा सकें तभी वह सही मायनों में बाल- साहित्यकार के दायरा में आएंगे ।
वर्तमान में बाल साहित्य तो लिखे जाते हैं पर उसके पाठक बच्चों की रुचि में कमी होती जा रही है। डिजिटलाइजेशन की दुनिया में बच्चे पठन कौशल के स्थान पर दर्शन एवं चित्रात्मक शैली की ओर आकर्षित हो रहे हैं, जो कि बाल साहित्य को प्रभावित कर रही है । अतः आज बालकों के आज की रूचि को ध्यान में रखकर कलात्मक, रेखाचित्रात्मक शैली में साहित्य रचना करने की जरूरत है ताकि बालकों का रुझान इस ओर किया जा सके ताकि हिंदी साहित्य में बाल -साहित्य एवं बाल-साहित्यकार को विकासात्मक गति मिल सके।
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