स्थान---नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला- जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा--आलेख/निबंध
विषय--बाल साहित्य: एक परिचय
बाल साहित्य नाम से ही स्पष्ट है बच्चों का साहित्य जिसमें उनके हितों को ध्यान में रख कर कवियों लेखकों के द्वारा सृजन किया जाता है । बाल साहित्य नन्हें मुन्ने कम उम्र के बच्चों के लिए एक दर्पण की तरह है ,दर्पण देखकर हम खुद को जैसा चाहते हैं वैसा ही संवार लेते हैं ।उसी प्रकार बाल साहित्य बच्चों के मन में ज्ञान, मनोरंजन साहस,जय,पराजय, हर्ष, शक्तिशाली, कमजोर आदि अवधारणाओं धारणाओं को हम सीखा सकते हैं बतला सकते हैं समझा सकते हैं अनुभव करा सकते हैं । पढ़कर सुनकर आकर्षक चित्रों को देखकर बच्चे सीखते हैं ।जिसका प्रभाव जीवन पर्यन्त बना रहता है ।
बाल साहित्य की रचना करना बहुत ही कठिन कार्य है उनके सहज मनोभावों को समझ कर उन्हें परोसना जिसमें वो ग्राह्य मनोरंजक एवं शिक्षा प्रद हो ।अनेक साहित्यकारों के द्वारा सतत रचना किया जा रहा है और बाल साहित्य लेखन में उत्तरोत्तर विकास हो रहा है ।
बाल साहित्य में पहले मौखिक साहित्य का स्थान आता है
जिसमें दादा दादियों के द्वारा कहानी के रुप में बच्चों को सुनाया जाता है तोता मैना की कहानी,राजा रानियों की कहानी, जिसमें इमानदारी, मेहनत ,सच्चाई, मुसीबत का सामना करना, धार्मिक कहानियां आदि सुनाई जाती है बच्चों से प्रश्न भी किया जाता है कि अगर तुम उनके जगह पर होते तो क्या निर्णय करते ।
No comments:
Post a Comment