जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-सफलता
विधा-कविता (मुक्त छंद)
असफलता महज एक बाधा
दौड़ थी,
तुम राह से हटते हटते गये और
चुकते गये ।
असफलता से अ को अाज ही
हटाना है ,
मेहनत के हथौड़ी और छैनी से
ठोक कर।
मेहनत के शिलालेखों पर लिखा
जाए नाम,
आओ आज से ही करें कुछ नया
ऐसा काम।
हौसले का लिबास पहन उठा लें
लक्षित पहाड़,
फिर लगेगा उम्मीद से अधिक
पाया हूँ मैं ।
सफलता उनके कदम चूमती है
एक दिन,
जो बाधाओं को अपना पतवार
बनाते हैं ।
गिरते हैं सहसवार ही मैदान-ए
जंग में,
उठ झट दौड़ मंजिल को सहसा
पा जाते हैं ।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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