Thursday, November 19, 2020

बलौदाबाजार से संतराम कुम्हार की रचना- सफलता की राह

रचनाकार -  संतराम कुम्हार 
   जिला -  बलौदाबाजार (छ. ग.) 
     विधा - मुक्त कविता 
   शीर्षक - " सफलता की राह "
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सफलता की राह आसान नहीं होती।
मंजिल मिले बिना ये कभी नहीं सोती। 
राह में आते हैं मुश्किलों की आँधी, 
फिर भी कामयाबी की जलती है ज्योति।। 

कड़ी मेहनत और परिश्रम से,
जलवा तुमको दिखाना होगा। 
अपने लगन विवेक के बलबूते, 
कमल कीचड़ में खिलाना होगा।।

हौसले कर बुलंद अपना, 
आगे बढ़ कामयाबी की राह में। 
न घबरा फौलाद बन तू, 
न फंस व्यर्थ की अभिलाषा और चाह में।। 

नकारात्मक सोच का दमन कर। 
सकारात्मक ऊर्जा से अपना दम भर। 
खुद पर विश्वास बस रख तू,
आत्मविश्वास से रख कदम विजयपथ पर।। 

मजबूत अपनी बुनियाद कर। 
माँ की ओ कुर्बानी याद कर। 
गिर, सम्हल फिर चल, 
कर फतेह सफलता की हर शिखर, 

लक्ष्य को बना ले मंजिल अपना। 
पूरा कर फिर अपना ओ सपना।
सफल होता है वही जग में, 
सदुपयोग करे जो समय अपना।। 

साध कर अपने लक्ष्य पर बाण,
तीर चला अपने परिश्रम का। 
अर्जुन-सा नजर रख तू, 
न दिखे छवि मोह और भ्रम का।। 

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मौलिक रचना ( स्वरचित ) 
संतराम कुम्हार 
बलौदाबाजार (छ.ग.)

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