जिला :- महासमुंद
विषय :- लक्ष्य
विधा :- मनहरण घनाक्षरी
शीर्षक :- लक्ष्य
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नित आगे बढ़ो साथी,
कभी नहीं रूको साथी,
लक्ष्य हृदय में लिए,
नित्य कर्म कीजिए।
सपने न देखो बस,
रखो मन निज वश,
पाने उसे पुरजोर,
कोशिश भी कीजिए।
दिन रात ध्यान रहे,
स्वेद नद सा हो बहे,
लक्ष्य प्राप्ति को जी सदा,
पूर्ण वक्त दीजिए।
लक्ष्य एक साधकर,
निज सुख त्याग कर,
रूचिकर राह चुन,
समर्पण दीजिए।
मन में जूनून रहे,
हर हाल मिले कहें,
जीवन सधे इसी से,
बात मान लीजिए।
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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने लक्ष्य निर्धारित कर उसे प्राप्त करने के लिए निरंतर प्रयासरत रहने की बात कही है।
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