स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला-जांजगीर-चाम्पा/ छत्तीसगढ़
विधा-कविता मुक्त
विषय-लक्ष्य
शीर्षक- जीवन का लक्ष्य
जीवन का लक्ष्य, बनाकर चलो ।
मिले राहों में कांटे , हटाकर चलो ।
जीवन अमूल्य है, सबका होना चाहिए ।
हंसी सबके पास हो, नहीं रोना चाहिए ।
आंसुओं को सभी का, मिटाकर चलो ।
इसी जीवन में,यह कर्म होना चाहिए ।
मानवता का अपना,धर्म होना चाहिए ।
सब जाने यह बात, समझाकर चलो ।
सद्गुणों को समाज, अपनाता है ।
दुर्गुणों से हरदम, वह दूर जाता है ।
अच्छाइयों से मन, सजाकर चलो ।
मानव हित की राहें,भले हैं कठिन ।
जान जाता रहे, तब भी चलो हर दिन ।
हित को अपना प्राण, बसाकर चलो ।
मानव के दुश्मनों को,कभी न छोड़ना ।
मिटाके रख देना, अधूरा न छोड़ना ।
कभी न इनको मित्र, बनाकर चलो ।
जहां दिखे अंधेरा,उसका है उपाय ।
घबराने की बात, नहीं मेरे भाय ।
बस थोड़ा दीपक, जलाकर चलो ।
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