Friday, November 6, 2020

जांजगीर-चांपा से गिरधारीलाल चौहान की रचना- लक्ष्य

नाम-गिरधारी लाल चौहान
स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला-जांजगीर-चाम्पा/ छत्तीसगढ़
विधा-कविता मुक्त
विषय-लक्ष्य
शीर्षक- जीवन का लक्ष्य

जीवन का लक्ष्य, बनाकर चलो ।
मिले राहों में कांटे , हटाकर चलो ।

जीवन अमूल्य है, सबका होना चाहिए ।
हंसी सबके पास हो, नहीं रोना चाहिए ।
आंसुओं को सभी का, मिटाकर चलो ।

इसी जीवन में,यह कर्म होना चाहिए ।
मानवता का अपना,धर्म होना चाहिए ।
सब जाने यह बात, समझाकर चलो ।

सद्गुणों को समाज, अपनाता है ।
दुर्गुणों से हरदम, वह दूर जाता है ।
अच्छाइयों से मन, सजाकर चलो ।

मानव हित की राहें,भले हैं कठिन ।
जान जाता रहे, तब भी चलो हर दिन ।
हित को अपना प्राण, बसाकर चलो ।

मानव के दुश्मनों को,कभी न छोड़ना ।
मिटाके रख देना, अधूरा न छोड़ना ।
कभी न इनको मित्र, बनाकर चलो ।

जहां दिखे अंधेरा,उसका है उपाय ।
घबराने की बात, नहीं मेरे भाय ।
बस थोड़ा दीपक, जलाकर चलो ।

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...