सुंदरगढ़, ओडिशा
विधा-कविता
विषय-लक्ष्य
शीर्षक-तू चल
तू चल,तू चल,तू चल
एक पल ना विलंब कर
कहीं सुयोग ना जाए निकल
लक्ष्य का निर्धारण तू कर
तू चल,तू चल ,तू चल
राह के बाधाओं से ना डर
राह में रोड़े पहाड़ से खड़े
तू सागर को भी चीरता निकल
तू चल,तू,चल,तू,चल
विश्राम का समय नही अभी
टेढ़ी-मेढ़ी जीवन की डगर
एक मिशाल कायम तू कर
तू चल,तू चल ,तू चल
अपने लक्ष्य से ना मचल
गगन के पार है मुकाम तेरा
घनघोर अंधेरा ना रोक पाए डगर
तू चल,तू चल,तू चल
रुक गया तो पछतायेगा कल
लक्ष्य ना होगी हासिल
विपदाओं से गिरता सम्भलता तू चल।
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