स्थान-नवापाराखुर्द /सक्ति
जिला- जांजगीर-चांपा/ छत्तीसगढ़
विधा-कविता/आलेख
विषय--सफलता
शीर्षक-सफलता के राह
सफलता उनके हाथ आती है,जो कर्मों में डटे रहते हैं ।
एक दो दिन ही नहीं, वर्षों से अनवरत लगे रहते हैं ।
प्राचीनकाल में लोग, हजारों वर्षों तक तपस्या करते थे ।
पुराणों में लिखा है तब उनको ,मन चाहा वरदान मिलते थे ।
ये लोग ऐसे होते हैं जैसे ,राख में चिंगारी दबे रहते हैं ।
भले ही जीवन उनका बितता ,रहता कचरे की ढ़ेर में ।
पलते रहते सहते बिना, मुंह खोले दुनियां के अंधेर में ।
चाहे लाख तुफां आये इन पर, आंच नहीं बचे रहते हैं ।
अर्जुन की तरह लक्ष्य धारी, चिड़िया की आंख पर नजर ।
पर्वत सागर में भी अपने लिए,खोज लेते चलते फिर डगर।
अंगद जैसे पांव इनके भरी सभा, बिना टसमस जमें रहते हैं
सफल हुए लोगों से सफलता, कैसे मिले बात निकलती है ।
जो करते उनके अनुभव का अनुकरण सफलता मिलती है ।
सफलता पाने के लिए एक सोने की तरह हर पल तपे रहते हैं
अपनी कविताओं को प्रवाह पूर्ण बनाए रखने के लिए लेख से सम्बंधित शब्द का चुनाव कैसे करते हैं?
ReplyDeleteआपकी कविताएं अच्छी लगती है। 🙏
अपनी कविताओं को प्रवाह पूर्ण बनाए रखने के लिए लेख से सम्बंधित शब्द का चुनाव कैसे करते हैं?
ReplyDeleteआपकी कविताएं अच्छी लगती है। ��