Thursday, November 19, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- सफलता

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
     संबलपुर-जिला -कांकेर,(छ.ग.)
     विषय- सफलता
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            *सफलता*
 जीवन में बहुत कुछ 
सुनना, सहना है पड़ता ,
खोना और पाना भी 
निगाहों में है  पड़ता।

तब जाकर सफलता 
चूमती है कदम हमारे,
धैर्य,साहस,कर्मठता को 
वरण करना है पड़ता।

सपनों के पंखों से 
लक्ष्य तक पहुँचना है पड़ता,
टूटे सपनों,रूठे अपनों के 
संग झेलना है पड़ना।

तिमिर भरे और दुर्गम 
राहों को है स्वीकारना,
मंजिल मिलेगी एक दिन जरूर 
दुनियाँ को मानना है पड़ता।

काँटों से ना घबराना,
हौसलों को फौलाद करो,
पानी हो सफलता तो हर 
जख्म को सहना है पड़ता।

दुनियाँ छू ना पाएं,
उन बुलन्दियों को छू लो।
सूरज गर रोके प्रकाश, रोशनी का 
नव ईजाद  करना है पड़ता।

व्यर्थ  की बातों में 
समय तुम ना बिताना,
आजाद ख्यालों संग,बेख़ौफ 
पथ पर बढनाहै पड़ता।

      नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर,कांकेर,( छ.ग)

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