जिला - बलौदाबाजार ( छ.ग. )
विषय - चिलमीलिका
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - जुगनू रानी
*****************************
// जुगनू रानी //
घनी अँधेरी रात हो ,
आँधी या बरसात हो ,
घर जंगल या खेत मे ,
चाहे जितनी क्षमता हो ,
जहाँ - तहाँ थोड़ी ही सही ,
मैं सदा प्रकाश फैलाऊँगी ,
चमक भले ही फीकी हो ,
अस्तित्व कभी न मिटेगा ,
अखण्ड आत्मविश्वास जगेगा ,
पथ प्रशस्त हो जाएगा ,
शक्ति धैर्य पराक्रम मेरा ,
परिस्थितियों से नहीं हारेगा ,
चाँद और सूरज के ही सहारे ,
कब तक दुनिया देखूँगी ?
तुच्छ नहीं मैं , क्षुद्र नहीं मैं ,
अपना दीपक स्वयं बनूँगी ,
मैं हूँ जग की जुगनू रानी ,
चिलमिल - चिलमिल चमकूँगी ,
चिलमीलिका कहलाऊँगी ,
प्रेरणास्रोत बनूँगी सबकी ,
इतिहास भले ही भूल जाये ,
कोई याद करे या न करे ,
अपना कर्तव्य निभाऊँगी ,
जीवन भर मुस्काऊँगी ।
---#---#---#---
No comments:
Post a Comment