राज्य: छत्तीसगढ़
जिला: रायगढ़
शीर्षक: कविता हूँ मैं
विधा: छंदमुक्त रचना
मनोभावों को शब्द देती,
शब्दों की माला मैं बनाती।
अक्षर से फिर शब्द बनाकर,
छंदों से उसे सजाती।
भाव जो मन में आये,
उनको काव्य में उतारती।
कभी शांत तो कभी रौद्र,
कई रसों से उन्हें सँवारती।
कभी कोमल वर्णों से,
तो कभी कटाक्ष पर प्रहार करती।
कवि की कविता हूँ मैं,
किसी से भी मैं नहीं डरती।
काव्य पथ में अडिग रहकर,
राही बन मैं निरंतर चलती।
कभी सत्य पर रहूँ आधारित,
कभी कल्पना में मैं पलती।
स्वरचित मौलिक रचना
-इन्दु साहू
रायगढ़ (छत्तीसगढ़)
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