Monday, November 23, 2020

कांकेर से मीराआर्ची चौहान की रचना- लोक कला

रचयिता-मीराआर्ची चौहान
जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-लोककला
विधा-कविता (मुक्त छंद)

छत्तीसगढ़ की लोककला
अलग रखती  है पहचान ।
पंडवानी  और लोरिक चंदा
छत्तीसगढ़ के  हैं आन।।

भरथरी ,ढोलामारु की कथा,
धनकूल और जगार गीत।
फूलबासन की कथा बताते,
छत्तीसगढ़ की कला संगीत।

पंथी,कर्मा ,सुआ , ददरिया,
लोकगीत की  अनोखीआन ।
छत्तीसगढ़ के लोककला को,
देते हैं  देश में अलग पहचान ।

लोक संस्कृति की अद्भुत छाप,
छत्तीसगढ़ की महिमा महान।
कलाऔर संस्कृति  अमिट  यहां,
देती विश्व में अपनी पहचान ।।

मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
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