जिला-कांकेर,छग
शीर्षक-लोककला
विधा-कविता (मुक्त छंद)
छत्तीसगढ़ की लोककला
अलग रखती है पहचान ।
पंडवानी और लोरिक चंदा
छत्तीसगढ़ के हैं आन।।
भरथरी ,ढोलामारु की कथा,
धनकूल और जगार गीत।
फूलबासन की कथा बताते,
छत्तीसगढ़ की कला संगीत।
पंथी,कर्मा ,सुआ , ददरिया,
लोकगीत की अनोखीआन ।
छत्तीसगढ़ के लोककला को,
देते हैं देश में अलग पहचान ।
लोक संस्कृति की अद्भुत छाप,
छत्तीसगढ़ की महिमा महान।
कलाऔर संस्कृति अमिट यहां,
देती विश्व में अपनी पहचान ।।
मीराआर्ची चौहान
कांकेर,छग
___,,,,,__________________
No comments:
Post a Comment