जिला - बलौदाबाजार ( छ. ग. )
विषय - लोक कला/साहित्य
विधा - छंद मुक्त कविता
शीर्षक - छत्तीसगढ़ की लोक कलाएँ
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// छत्तीसगढ़ की लोक कलाएँ //
छत्तीसगढ़ की लोक कलाएँ ,
जन मानस में छायी है ।
देश - विदेशों में है प्रसिद्धि ,
आपनी पहचान बनाई है ।।
रीति - रस्म इतिहास कथाएँ ,
जीवन के अगणित रंग ।
लोक कला में समाहित होते ,
ग्रामीण परिवेश उमंग ।।
पंथी गीत पण्डवानी भरथरी ,
करमा सुआ ददरिया ।
भोजली डंडा बांस देवार गीत ,
माता जसगीत नवरतिया ।।
लोरिक चंदा राऊत नाचा और ,
सधौरी सोहर बिहाव गीत ।
गौरा गम्मत ढोलकी गीत में ,
परम्परा पूर्वजों से प्रीत ।।
रामचन्द्र देशमुख मंदरा जी ,
सुरुजबाई देवदास बंजारे ।
केदार यादव रेखा जलक्षत्री ,
लोक कला के बड़े सितारे ।।
नवलदास और बैतलराम जी ,
धुरवाराम मरकाम फिदाबाई ।
पंचराम मिरझा कुलवंतीन ,
लोक कला के सभी सिपाही ।।
तीजन बाई रितु वर्मा जी ,
रजनी रजक ममता चंद्राकर ।
दिलीप सड़ंगी नीलकमल जी ,
लोक कला के लोकप्रिय हस्ताक्षर ।।
जाति वर्ग समुदाय से पोषित ,
ऐसी उन्नत संस्कृति हमारी ।
अनेकता में एकता दर्शाती ,
छत्तीसगढ़ की धरोहर प्यारी ।।
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