पता- भाटापारा, छत्तीसगढ़
विधा- कविता छंद मुक्त
शीर्षक- दूरी का एहसास
तुमसे दूर जाने के एहसास से,
ये दिल टूट सा जाता है।।
क्या करू, कैसे करूँ अब,
कुछ समझ मे नही आता है।।
जिंदगी समझ लिया था दिल ने,
अब ये बेजान सा हो जाता है। ।
कैसे बदलू इस वक़्त को,
ये कुछ समझ ही नही पाता है।।
न प्यार में कमी है, न जज्बातो में,
फिर ऐसा दौर क्यों आ जाता है।।
तुमसे दूर जाने के एहसास से,
ये दिल टूट सा जाता है।।
सोमेश सिन्हा मुसाफिर
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