Monday, November 16, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना- भाई दूज

रचनाकार-नलिनी बाजपेयी
 संबलपुर -जिला-कांकेर ( छ. ग.)
      *भाई दूज* 


भाई बहन का पावन 
     नाता जग में सबको है भाता।

यम की बहन यमुना को,
      भाई ने आशीष दिया।
आज के दिन जो भाई बहन
      कालिंदी स्नान करे जतन।

मोक्ष मिले सुरभित हो 
     जीवन,दोनों का प्रेम 
अमर हो महके कानन।

भाई-बहन का यह दिन 
       पावन यम द्वितीया
  है कहलाता।

बिखरी घर आँगन
       में खुशियाँ,कुंकुम ,
मिठाई थाल में गुजिया।

बहन हर्षित हो,भाई
         के भल सजाएं,
बीती बातें याद करे 
       मन में बस जाएं।

भाई दूर रहे या पास, 
      मिलने की होती आस,
भाई-बहन का निश्छल
        प्रेम का दिन है खास।

भाई को तिलक लगाकर,
        मीठा कुछ खिलाऊँ,
जुग-जुग जीएं प्यारा भैया,
        कामना करती जाऊँ।

कभी कोई संकट 
          ना भैया कभी,
तेरी खुशहाली के
           गीत मैं गाऊँ।

प्रस्तुत कविता में भाईदूज के पावन पर्व के बारे में बताया गया है ।यमुना और भाई यमराज के बारे में बताया गया है।
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    नलिनी बाजपेयी
  संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)

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