निवास--बैरन बाजार,रायपुर ।
जिला-रायपुर,छत्तीसगढ़ ।
विधा--छंद मुक्त,कविता ।
शीर्षक--"" भाई दूज "" ।
===||••भाई दूज ••||===
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पौराणिक कथाओं से उभरे--
भाई दूज की परम्परा--
बहने करती ,भाई का भाल तिलक ।
भाई की,लम्बी उम्र के लिए--
उतारे आरती,मीठा खिलाती,
नये वस्त्रों का,आदान प्रदान होता ।
रिश्ते खूनी हो या मुँहबोले हों ---
भाई दूज का मान-सम्मान,
कभी भी,कम नहीं होता,
दिल से,निभाये जाते हैं रिश्ते ।
रखें मरते दम तक---
रिश्ते का मान,
अमीर हो या गरीब आदमी,
निभाते हैं,इस अपनेपन का भाव ।
बना रहे,भाई बहन का प्यार--
भाई दूज का,रहता खूब इंतज़ार,
जब जब आता,बहनों का दिल,
पर्व की रीत निभाने,मचल उठता ।
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व्याख्या:--उपरोक्त रचना के माध्यम से यह कहना चाहता हूँ कि भाई दूज,भाई बहन के प्यार को बधाई और शुभकामनाएं के साथ बाँधे रखने की परम्परा है ।
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