स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़
विधा- कविता
शीर्षक -"खगोल-विज्ञान"
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आकाशीय पिंडों से सजा
ब्रह्मांड हमारा लगे अनोखा
उपग्रह,ग्रह,तारे इसके सदस्य
मुखिया है मानो आकाशगंगा
अरब वर्षों से चलाए- मान
अचरज जब लगाएं अनुमान
चंद्रमा देख बाल- मन प्रसन्न
जब जाने खगोलीय पूरा ज्ञान
बड़ों का भी घूम जाए अंतर्मन
प्रकाश वर्ष जैसा मापन
अथाह ब्रम्हांड का ये आंगन
वाह!अद्भुत,अद्वितीय,अनुपम
खगोलीय ज्ञान का यह प्रांगण
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