स्थान- दुर्ग (छ.ग.)
विधा- मुक्त
विषय- खगोल विज्ञान
शीर्षक- *आकाश दर्शन*
सारी दुनिया की दिनचर्या
दूर अंतरिक्ष में तय होता
सूर्योदय से दिन चले तो..
सूर्यास्त से घोर अँधियारा ,
सौर-परिवार का मुखिया तारा
आठ ग्रहों संग सूर्य हमारा ।
तारे टिमटिम चमकते ऐसे,
नभ में दीप जले हों जैसे
सप्तर्षि,धूमकेतु, पिंड उल्का
आकाशगंगा संग निहारिका
टूटते तारे से माँगे मन्नत
आओ कर लें आकाश दर्शन।
शुक्र सबसे चमकीला ग्रह
कहें इसे सांध्य, भोर का तारा
वृहस्पति का आकार बड़ा
मंगल में जीवन की संभावना
लाल ग्रह यह है कहलाता
कहते यहांँ से एलियन आता।
शनि तीन वलयों वाला
बुध रवि के पास रहे सदा
पृथ्वी पर बसता है जीव
तभी तो कहलाये अद्वितीय
अरुण को खोजा दूरबीन ने
दूर रहकर वरुण हुये ठंडे
चंद्रमा पृथ्वी का एक उपग्रह
देख इसे करते, व्रत -पूजन
आसमान में सबसे न्यारे
मामा कहते बच्चे सारे ।
सुंदर ये नजारे झिलमिल
रहते सारे ये हिलमिल
अनेकता में एकता की मिसाल
सीख लें इनसे सारा संसार ।।
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