खैरागढ़, जिला-राजनांदगांव
राज्य-छत्तीसगढ़
शीर्षक-जिंदगी न मिलेगी दोबारा
विधा-कविता
न कर अभिमान, धन दौलत का,
न यौवन,न रंग रूप का।
न ज्ञान ,न विज्ञान का,
न कर अपने पूत सपूत का।
क्षणभंगुर है ये दुनिया,
सब रह जायेगा धरा का धरा।
नही मिलेगा किसी का सहारा,
क्योंकि?
ये जिंदगी न मिलेगी दोबारा।।
मित्र हो ,चाहे दुश्मन,
पड़ोसी हो, चाहे परिजन।
दुर्जन हो ,चाहे सज्जन,
पशु पक्षी हो,चाहे इंसान।
दानव हो,चाहे भगवान,
फकीर हो ,चाहे धनवान।
सबसे प्रेम से हँस बोल ले,
व्यवहार में मीठा रस घोल ले।
जीवन के हर सुख-दुःख बाँट ले,
जाना है जब ,सब छोड़ के।
खुशियाँ मना जीवन के हर मोड़ के,
अभिमान की दुनिया से निकल।
न छोड़ जिंदगी को बेसहारा,
क्योंकि?
ये जिंदगी न मिलेगी दोबारा।।
ये जिंदगी न मिलेगी दोबारा।।
महदीप जंघेल
खैरागढ़, राजनादगांव
No comments:
Post a Comment