Saturday, November 7, 2020

कांकेर से नलिनी बाजपेयी की रचना

रचनाकारा-नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, जिला-कांकेर( छ .ग.)
    विषय-स्वैच्छिक
           गजल सृजन
          काफ़िया-आने
          रदीफ-बहुत हैं
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 यहाँ भूलने के बहाने बहुत हैं,
आशिकों के दर अफसाने बहुत हैं।

चाहे कितनी भी अब मजबूरी हो,
 जीवन जीने के फसाने बहुत हैं।

हम चले जाएंगे कभी दुनियाँ से,
तुम्हारे तो अब ठिकाने बहुत हैं।

रो कर सदैव गुजारी है जिंदगी,
यादों पर ही पल बिताने बहुत हैं।

उल्फत के चर्चे अब बहुत हैं *नलिन*'
राज की बात अब छुपाने बहुत हैं।

*व्याख्या* प्रस्तुत गजल में जीवन जीने के लिए बहाने,फसाने,यादों पर ही पल बिताने की बात कह रहे है।

      नलिनी बाजपेयी
  संबलपुर,कांकेर,(छ.ग.)

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