संबलपुर जिला-कांकेर,( छ. ग.)
विषय-बाल साहित्य-एक परिचय( *आलेख* )
दिनाँक-21.11.20
*बाल साहित्य-एक परिचय*
बाल साहित्य अर्थात *"बच्चों के पढ़े जाने लायक साहित्य'* बाल साहित्य लेखन परंपरा बहुत पहले से चली आ रही है ।नारायण पंडित ने पंचतंत्र नाम की पुस्तक लिखी थी ।जिसमें पशु पक्षियों के माध्यम से कहानियाँ लिखकर बच्चों को चरित्र निर्माण की शिक्षा दी जाती है।वैसे देखा जाए तो बहुत पहले से ही घर में दादी, नानी लोग बच्चों को कहानियाँ सुनाते रहे हैं। यह हमें परंपरा से प्राप्त होते रहे हैं। दादी,नानी द्वारा बताई गई कहानियाँ एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक हस्तांतरित होती रही है। कहानियों के माध्यम से कभी स्वर्ग की सैर कराना... कभी परियों के देश में घुमाना .......कभी काठ के घोड़े को राजकुमार द्वारा आकाश में उड़ाना ,और साथ ही साथ कहानियों के माध्यम से बच्चों के अंदर सत्य ,त्याग, बलिदान, साहस ,परिश्रम जैसे नैतिक गुणों को भरना होता था।बाल साहित्य बच्चों का मनोरंजन करते ही है,साथ ही उनके अंदर नैतिक गुणों की वृद्धि भी करते है।उनके माध्यम से उनका चरित्र निर्माण किया जाता है। उनके अंदर जीवन के यथार्थ को पहचानने की क्षमता प्रदान करना होता था। यही बाल साहित्य का महत्वपूर्ण उद्देश्य है ।' आज के बच्चे कल के नागरिक हैं 'अतः कहानियों के माध्यम से उनका चरित्र निर्माण किया जाता है ।यही बच्चे कल खगोल शास्त्री और अंतरिक्ष यात्री बनेंगे तो ऐसे में बाल मनोविज्ञान लिखने वाले लेखक को बाल मनोविज्ञान का ज्ञान होना आवश्यक है ।कहते हैं बच्चों का मन मक्खन की तरह होता है तो ऐसे में अच्छे गुणवत्तापूर्ण बाल साहित्य के माध्यम से बच्चों के अंदर अच्छे संस्कार त्याग, प्रेम ,समर्पण, सद्भावना और भारतीय संस्कृति को अपने अंदर आत्मसात करने की क्षमता विकसित की जा सकती है ।बाल साहित्य के संदर्भ में श्री के.पिल्लई ने चिल्ड्रन बुक ट्रस्ट की स्थापना सन 1957 में की थी। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों के लिए उचित डिजाइनिंग व सामग्री उपलब्ध कराना है ।इसमें पाँच वर्ष से लेकर सोलह वर्ष तक के बच्चों के लिए निम्न बेहतर साहित्य उपलब्ध है ।
1. पौराणिक कथाएं- कृष्ण सुदामा, पंचतंत्र की कहानियाँ, पौराणिक कथाएं,प्रहलाद ,ध्रुव
2. ज्ञानवर्धक-उपयोगी अविष्कार, पर्वत की पुकार रंगों की महिमा, विज्ञान संबंधी खेल ,
3.रहस्य रोमांच- अनोखा उपहार, जासूसों की जासूस ,ननिहाल में गुजरे पाँच दिन ,
4.उपन्यास कहानियां-चौबीस कहानियां, इंसान का बेटा, गुड्डी, मास्टर साहब
5.महान व्यक्तित्व -महान व्यक्तित्व पार्ट 1 से 10 तक.
इसके अतिरिक्त वन्य जीवन, पर्यावरण से संबंधित ,किताबों को विभिन्न भाषाओं में प्रकाशित की गई ।इसके अतिरिक्त भारतीय भाषाओं में चंपक ,बालहंस, चंदामामा, नन्हे सम्राट नंदन, तथा युवाओं के लिए मुक्तक प्रकाशित की जाती है। विभिन्न अखबारों में बच्चों के लिए विशेष कॉलम की व्यवस्था की गई है ,ताकि बच्चे अपनी सृजन क्षमता को बढ़ा सके। अपनी प्रतिभाओं को उभार सके।
इस तरह बाल साहित्य का संक्षिप्त परिचय आपके समक्ष प्रस्तुत है।
नलिनी बाजपेयी
संबलपुर, कांकेर, (छ. ग.)
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