निवासी:-कांकेर(छ. ग.)
विषय:-बाल साहित्य
शीर्षक:-बाल साहित्य में बच्चों की रुचि कैसे उत्पन्न करें।
विधा:-आलेख
बाल साहित्य में बच्चों की रुचि कैसे उत्पन्न करें।
सबसे पहले हम ये जानें कि बाल साहित्य क्या होता है।बाल साहित्य ऐसा साहित्य होता है जिसे बच्चों के मनोरंजन, उनकी रुचि,उनकी जिज्ञासा,उनके कोमल बाल मन के विकास एवं उनके बाल मन के अनुरूप तैयार किया जाता है।जिसमें कहानी,कविताएँ,लेख,गीत,चुटकुले,पहेलियाँ हो सकती हैं।
आज बच्चे बालसाहित्य से दूर होते जा रहे हैं इसका कारण है,हम बच्चों को मनोरंजन के अन्य विकल्प उपलब्ध करा देते हैं।आज माता पिता बच्चे अगर बहुत तंग करें तो उनका ध्यान बटाने उनके हाथ में मोबाइल फोन पकड़ा देते हैं।अपने बच्चों को कहानी,बालगीत या बाल कविताओं की किताब ला कर नहीं देते और दें भी तो बच्चे क्यूँ पढ़ेंगे?जब तक उनकी रुचि न हो।
बच्चों में रुचि कैसे उत्पन्न होगी।हम सभी जानते हैं बच्चे अनुकरण से सीखते हैं।बच्चों में रुचि तब उत्पन्न होगी जब हम बाल साहित्य में रुचि लेंगे।अगर हम बच्चों को किसी बाल कहानी किताब पढ़ कर सुनाएँ।तो उनके मन में विचार आएंगे-वाह कितनी अच्छी कहानी है,क्या इसमें और भी कहानी है,ऐसी किताब कहाँ मिलती है,क्या आप और लाएंगे ऐसी किताब।ऐसे विचार जब आएंगे तो उनके मन में रुचि उत्पन्न होगी किताबों के प्रति और ये बातें मैं हवा में नहीं कर रही ये मेरा स्वयं का अनुभव है।विद्यालय के ही पुस्तकालय की कहानी की किताब मैं बच्चों को पढ़ कर सुनाती हूँ और मैंने देखा है उन्हें इन किताबों में रुचि लेते और वो मुझसे किताब ले कर घर ले जा कर पूरी किताब पढ़ स्कूल में उन कहानियों को सुनाते भी हैं जो उन्होंने पढ़ी है।ये रहा पहला विकल्प बच्चों में बालसाहित्य के प्रति रुचि उत्पन्न करने का।
दूसरा विकल्प ये है कि आज पढाई ऑनलाइन ही हो रही है तो माता पिता न भी चाहें तो उनको मोबाइल बच्चों को देना पड़ता है।अगर बच्चों में फोन का नशा है तो आप भी उनके साथ बैठ फोन खेलिए।आपको लग रहा होगा मैं पागल हो गई हूँ।ये भी एक तरीका है,आप बच्चों के साथ यूट्यूब में बाल कहानियां देखिए,बाल गीत,कविताएँ सुनिए और उनके वीडियो देखिए।ये दो तरीके मुझे बच्चों में बाल साहित्य के प्रति रुचि उत्पन्न करने हेतु सही लगते हैं।आगे आप मुझसे ज्यादा अनुभवी और समझदार हैं, आप भी इन दो तरीकों के अलावा नए तरीके सोच सकते हैं।बच्चों में बाल साहित्य के प्रति रुचि उत्पन्न करने के लिए।
-कु.गरिमा पोयाम
कांकेर(छ. ग.)
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