Saturday, November 21, 2020

महासमुन्द छत्तीसगढ़ से कवि सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"की कविता - भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुन

*भगवान सहस्त्रबाहु अर्जुन*

कार्तिक मास शुक्ल सप्तमी को हुआ सहस्त्रबाहु का अवतरण।
राजराजेश्वर,कार्तवीर्य,सहस्त्रार्जुन नाम,दशानन आया शरण।
महाराज हैहय की दसवीं पीढ़ी में माता पद्मिनी के थे संतान।
सुदशेन,चक्रावतार,सप्तद्रवीपाधि,दशग्रीविजयी थे कृतवीर्यनन्दन।1।
चंद्रवंशी महाराजा कृतवीर्य के थे परमवीर चक्रवर्ती एकमात्र संतान।
दत्तात्रेय से हजार हाथ का वरदान ले मिला सहस्त्रबाहु अर्जुन नाम।
विष्णु के 24वें अवतार,है भागवतकथा में इनका वर्णन।
लंकापति रावण को हराया,मिला इन्हें राजराजेश्वर का सम्मान।2।
हैहयवंशी व सहस्त्रबाहु अर्जुन के लिए एक खराब समय भी आया।
सहस्त्रार्जुन ने जमदग्नि के आश्रम से कामधेनु माता को चुराया।
भार्गववंशी परशुरामजी ने क्षत्रिय राजराजेश्वर अर्जुन को हराया।
इसी कारण कहा जाए धरती से 21बार क्षत्रियों को मिटाया।3।
अखंड भारतीय संस्कृति के विस्तारक राजा सहस्त्रबाहु माटी के लाल।
महिष्मती(महेशपुर)म.प्र.में थी कर्मभूमि,तपोभूमि राजधानी विशाल।
जहाँ आज भी प्रसिद्ध राजराजेश्वर मंदिर में जलता 11अखंड दीपमाल।
धन्य कलार,कलाल,कलवार समाज जिनके अधिपति अर्जुन दिकपाल।4।
*सुन्दर लाल डडसेना"मधुर"*
ग्राम-बाराडोली(बालसमुंद),पो.-पाटसेन्द्री
तह.-सरायपाली,जिला-महासमुंद(छ. ग.) पिन- 493558
मोब.- 8103535652
          9644035652
ईमेल- sldmadhur13@gmail.com

No comments:

Post a Comment

दुर्ग से प्रिया गुप्ता की रचना- चाहत

कवि-प्रिया गुप्ता जिला- दुर्ग राज्य-छत्तीसगढ़ शीर्षक-चाहत विधा-काव्य संपर्क-7974631528  दीवानगी दीवानों की वफ़ा है दोस्तो   काति...