बिलासपुरछ.ग.
विषय-आदमी
शीर्षक-आदमी- आदमी में फर्क होता हैं
आदमी- आदमी में फर्क होता है |
उनके विचारो में तर्क होता है |
कोई भावुक तो कोई निर्दयी होता है |
कोई अमीर तो कोई फ़क़ीर होता है |
मिलते है जीवन के मोड़ पे कई लोग,
पर इंसानियत सभी में नही होता है |
किसी के पास गैरो के दुख बांटे ,
वो दिल नही होता है |
आदमी=आदमी में फर्क होता है |
उनके विचारो में तर्क होता है |
बनाया जिस ईश्वर ने इंसान को ,
वो इंसान खुद को ईश से बड़ा समझता है |
इंसान =इंसान की तरह नही रहता हैं |
आदमी आदमी में फर्क होता है |
उनके विचारो में तर्क होता है |
कभी दिखवा करते है कभी छलावा करते है |
डरते नही ईश से बस अपनी मर्जी चलाते है |
अगर कोई अच्छा करे तो उनको वो भटकाते है |
स्वार्थ के लिए रिश्ते बनाते हैं|
पर उसको भी निभा नही पाते है|
काश ऐसा हो जाए इंसानो को इंसानो ,
की तरह जीना आ जाए |
फिर ना आंसू होंगे ना फसाद और ना ही कोई लचार होगा,
फिर राम राज्य आ जाए |
इंसानो को इंसानो की तरह जीना आ जाए |
आदमी=आदमी में फर्क होता है|
उनके विचारो में तर्क होता है|
रचनाकार-सावित्री यादव "सावि"
No comments:
Post a Comment