स्थान-रायगढ़
विधा-छत्तीसगढ़ी कविता
शीर्षक- धान के कटोरा
धान के कटोरा,
धान कटोरा के धुरा कपूर चिखला चंदन,
छत्तीसगढ़ महतारी के कोटि-कोटि वंदन।
मउर मुकुट रामगिरी महानदी पखारे पैईयां,
दंतेश्वरी चंद्रहासिनी महामाया हे आशीष देवईया।
इहें बल्लभाचार्य के जनम भूईयां चम्पारण से छंईया,
लोटा ल छुये पारस पथरा भिलाई सोना ढारे।
कोरबा म करिया हीरा उपजे बांगो खेत उपजाए,
हिरीमाइंस दल्लिराज हरा के गर्भ म रतन सजाय।
रहिन इहें सवरिन अस भक्तिन मोरध्वज अस दानी,
इहें जनम लिन वीर नारायण सिंह घासीअस गुरु ज्ञानी।
ऋषभधाम महाघाट रतनपुर इंहे हे दण्डक वन ,
इ धरती म चंदा लोरि के अमर प्रेम के गाथा।
सालहो ददरिया सुवा करमा चुमे जेकर माथा,
छत्तीसगढ़ी भाखा हर आंजे शब्द शब्द के अंजन।
डिग्री लाल जगत निर्भीक
साहित्य साधना सभा छत्तीसगढ़
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