Monday, November 2, 2020

महासमुंद से विनोद कुमार "जोगी" के दोहे

रचनाकार :- विनोद कुमार "जोगी"
जिला :- महासमुंद
विधा :- दोहा छंद
शीर्षक :- जोगी के दोहे

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१.
स्वान सरीखा हो सदा, नित्य समर्पण भाव।
जीवन उनपर झोंक दें, मिले जहाँ पर छाँव।।

२. 
अक्सर जीवन में मिले, जोगी कई तुफान।
उनसे लड़कर ही बने, जग में मनुज महान।।

३. 
लहरें उठती रोज ही, ओझल भव के पार।
बीच भँवर में है फँसा, जीवन का पतवार।।

४. 
ऊँच - नीच आते सदा, जीवन की यह रीत।
हर संभव कोशिश रहे, हो मन में नित मीत।।

५.
जिनकी गोदी में मिला, हमें सदा ही प्यार।
उनकी खुशियों के लिए, हरदम हों तैयार।।

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व्याख्या :- उपरोक्त पंक्तियों में रचनाकार ने जीवन मूल्यों को पंक्तिबद्ध करने का प्रयास किया है।

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