पता --------- कसडोल , छत्तीसगढ़
विषय ------पुराने पन्ने
शीर्षक ---- बीते लम्हे
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जब भी पुराने पन्ने मैं खोलता हूं !
झूठ नहीं , सच मैं बोलता हूं !
याद कर बीते लम्हों को ,
इत - उत मैं डोलता हूं !
कितने हसीन थे , बचपन के वो दिन !
चना चटपटी , इमली बूटे के थे शौकीन !
न था ज़माना , वाट्सप - फेसबुक का ,
दोस्तों , परिवार संग रहते थे तल्लीन !
पलटता हूं जीवन के कुछ पन्ने ,
वक्त के तराजू में खुद को तौलता हूं !
जब भी मैं ...............................
गुजर जाता था पल , सुकून से गांव में !
बीतता था दोपहर , अमरैया की छांव में !
शौक न रखते थे कभी मोटर कार की ,
होते थे आनंदित , कागज़ की नाव में !
नंगे पांव चलकर, कांटों की चुभन सहते थे ,
अब तो हर पल जूते पहनता हूं , खोलता हूं !
जब भी मैं ......................................
वर्ष 1992 , सांप्रदायिकता जब चरम पर थी !
14 बरस की मेरी उम्र , नवयौवन पर थी !
मेरे ह्रदय में बहने लगी थी इक सरिता ,
सांप्रदायिकता पर लिखी मैंने पहली कविता !
लिखने बैठता हूं , जब मैं नई रचना ,
पहली कविता को पढ़ता हूं , बोलता हूं !
जब भी मैं .....................................
मैंने गुजारे हैं बहुत दिन ग़रीबी में !
फिर भी कम न थे , यार मुफलिसी में !
आज नजर फेरता हूं जब चारों तरफ ,
चंद ही लोग , बचे हैं करीबी में !
सुनता नहीं कोई मेरी सदा ,
पास बुलाने जब जुबां खोलता हूं !
जब भी मैं ................................
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