Wednesday, November 4, 2020

कसडोल से चेतन सिंह की रचना- बीते लम्हें

रचनाकार -- चेतन सिंह
पता --------- कसडोल , छत्तीसगढ़
विषय ------पुराने पन्ने
शीर्षक ---- बीते लम्हे 
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जब भी पुराने पन्ने मैं खोलता  हूं !
झूठ  नहीं , सच   मैं   बोलता हूं  !
याद      कर    बीते   लम्हों   को , 
इत  -  उत       मैं    डोलता    हूं !

कितने   हसीन  थे , बचपन के वो दिन !
चना चटपटी , इमली बूटे के थे शौकीन !
न था ज़माना ,  वाट्सप - फेसबुक का , 
दोस्तों , परिवार    संग रहते थे तल्लीन !
पलटता   हूं   जीवन  के  कुछ  पन्ने , 
वक्त के तराजू में खुद को तौलता हूं !
जब भी मैं ...............................

गुजर  जाता था  पल , सुकून से गांव में !
बीतता था दोपहर , अमरैया की छांव में !
शौक  न  रखते  थे कभी मोटर कार की , 
होते  थे  आनंदित ,  कागज़ की नाव में !
नंगे पांव चलकर, कांटों की चुभन सहते थे ,
अब तो हर पल जूते पहनता हूं , खोलता हूं !
जब भी मैं ......................................

वर्ष 1992 , सांप्रदायिकता जब चरम पर थी !
14  बरस   की  मेरी  उम्र , नवयौवन  पर थी !
मेरे   ह्रदय  में  बहने  लगी  थी  इक  सरिता , 
सांप्रदायिकता  पर लिखी मैंने पहली कविता !
लिखने   बैठता  हूं , जब  मैं  नई  रचना , 
पहली कविता को पढ़ता हूं , बोलता हूं !
जब भी मैं .....................................

मैंने  गुजारे  हैं  बहुत   दिन  ग़रीबी में !
फिर भी कम न थे , यार मुफलिसी में !
आज नजर फेरता हूं जब चारों तरफ ,
चंद  ही   लोग  ,  बचे  हैं   करीबी  में !
सुनता     नहीं     कोई     मेरी   सदा , 
पास  बुलाने  जब   जुबां   खोलता हूं !
जब भी मैं ................................


 

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