स्थान-नवापाराखुर्द/सक्ति
जिला-जांजगीर -चाम्पा/छत्तीसगढ
विधा-कविता
शीर्षक-पुराने पन्ने
पुराने पन्ने देखा मैं,लक्ष्मण मस्तूरिया दिख गये ।
छत्तीसगढ़ मिट्टी के बारे में,वाह वाह जो लिख गये ।
मेहनत कमजोर गरीब वर्ग पर,उनकी कलम चली है ।
उन्होंने जो दीप जलाया ,किसी की न वैसी जली है ।
जीवन की राहों के कांटे हटा, पग पग पुष्प बिछ गये ।
हर लोगों के दर्द को समझे, बताये निकलने के राह ।
ग्राम शहर नगर देश प्रेम पर,जगा दिये मन में उत्साह ।
कुछ चले कुछ चलते रहेगे, लोगों के जवाब मिल गये ।
सूरज चांद नदी नाले तालाब, मंदिर मस्जिद उनके कलम में है ।
धरती श्रम वृक्ष छाया वर्षा सावन बाग बगीचे ,सत्य कर्म धर्म भी भी चिंतन में हैं ।
अन्याय को ललकारे नीति को पुकारें ,,समाज सुधार बातें रख गये ।
लोग उनके लिखे गीत यहां वहां, सुबह-शाम है गाते ।
जिसे देखो वही गुनगुनाकर , उनके लिए आशीष बरसाते ।
जिसने उनको कभी देखा नहीं,उनका मन भी जीत गये ।
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