Saturday, November 7, 2020

रायगढ़ से पुष्पा पटनायक की रचना- दुनिया

रचयिता- पुष्पा पटनायक 
स्थान-बनाई तमनार, रायगढ़ 
विधा- कविता 
शीर्षक -"दुनिया"
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हे प्रभु ये कैसी दुनिया गढ़ी । 
इस पर ईर्ष्या,द्वेष,अहंकार भी मढ़ी। 
क्या होगा संसार का,ये सोंच पुष्पा डरी। 
हे प्रभु ये कैसी दुनिया गढ़ी। 

समय नही यहाँ किसी के लिए। 
अपनों से अपनापन नहीं । 
सब को स्वयं की ही पड़ी । 
हे प्रभु ये कैसी दुनिया गढ़ी। 

मशीनों में ही ध्यान लगा। 
धन कमाने से फुर्सत नहीं। 
मानव बन कर रह गया एक घड़ी । 
हे प्रभु ये कैसी दुनिया गढ़ी। 

बदल दे दुनिया के ये चलन। 
कर ले थोड़ा आत्ममंथन। 
कर जोड़ पुष्पा करती निवेदन । 
वरना हो जाएगी देर बड़ी। 
हे प्रभु ये कैसी दुनिया गढ़ी। 

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